असम में वायुसेना का विमान क्रैश, लैंडिंग के वक्त बीच से हुए दो टुकड़ेज् धू-धू कर जला एन-32

0
8

जोरहाट। भारतीय वायु सेना (ढ्ढ्रस्न) का एक अहम परिवहन विमान ्रहृ-32 असम के जोरहाट एयरबेस (रौरिया एयरफोर्स स्टेशन) पर एक भयानक हादसे का शिकार हो गया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, लैंडिंग के दौरान विमान में जोरदार धमाका हुआ और देखते ही देखते यह धू-धू कर जलने लगा। यह दिल दहला देने वाली घटना एयरबेस के अंदर ही हुई है। हादसे के तुरंत बाद एयरबेस पर मौजूद फायर ब्रिगेड और इमरजेंसी टीमों ने फुर्ती दिखाते हुए मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया। फिलहाल इस भीषण दुर्घटना के स्पष्ट कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है।
घास वाले उबड़-खाबड़ हिस्से में हुई लैंडिंग
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह विमान नियमित उड़ान पर था और लैंडिंग के समय पक्की एयरस्ट्रिप पर उतरने से चूक गया। विमान की लैंडिंग एयरबेस के उबड़-खाबड़ और घास वाले हिस्से में हुई, जिसके चलते यह बुरी तरह क्षतिग्रस्त होकर दो हिस्सों में बंट गया। बता दें कि असम के जोरहाट स्थित रौरिया एयर फोर्स स्टेशन पूर्वोत्तर भारत में वायु सेना के सबसे प्रमुख सैन्य ठिकानों में से एक है। यह एयरबेस न केवल असम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में रणनीतिक गतिविधियों, वायु अभियानों और सैन्य रसद की आपूर्ति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विमान में सवार वायु सैन्य कर्मियों की स्थिति पर सस्पेंस
इस दर्दनाक हादसे के बाद विमान में सवार क्रू मेंबर्स और अन्य वायु सैन्य कर्मियों की स्थिति क्या है, इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। भारतीय वायुसेना तुरंत ही इस पूरी घटना की उच्च स्तरीय जांच में जुट गई है। वायु सेना ने अपने एक संक्षिप्त बयान में केवल इतना कहा है कि जोरहाट में ्रहृ-32 विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ है और विस्तृत जानकारी मिलने पर आगे का अपडेट साझा किया जाएगा।
लगातार हादसों के बावजूद वायुसेना की रीढ़ है ्रहृ-32
सोवियत संघ द्वारा निर्मित एंटोनोव ्रहृ-32 विमान भारतीय वायु सेना के लिए बेहद अहम माना जाता है, लेकिन इसके साथ हादसों का एक लंबा इतिहास भी जुड़ा है। साल 1986 से लेकर अब तक भारत में लगभग 22 बार ्रहृ-32 विमान दुर्घटना का शिकार हो चुका है। इसकी सबसे हालिया दुर्घटना साल 2025 में दर्ज की गई थी। इन तमाम हादसों के बावजूद, ऊंचाई वाले क्षेत्रों और छोटे रनवे पर टेकऑफ-लैंडिंग करने की बेहतरीन क्षमता के कारण यह आज भी सेना का सबसे भरोसेमंद और अधिक इस्तेमाल होने वाला कार्गो प्लेन है। करीब 6.7 टन पेलोड या 40 से अधिक सैनिकों को एक साथ ले जाने की क्षमता वाला यह विमान हिमालयी और सीमावर्ती क्षेत्रों में रसद आपूर्ति की असली रीढ़ है।
इसी साल मार्च में भी जोरहाट ने देखा था खौफनाक हादसा
गौरतलब है कि जोरहाट एयरबेस से उड़ान भरने वाले विमानों के साथ यह इस साल की दूसरी बड़ी त्रासदी है। इसी साल मार्च महीने में एक नियमित प्रशिक्षण उड़ान के दौरान भारतीय वायु सेना का सुखोई-30 एमकेआई (स्ह्व-30रू्यढ्ढ) लड़ाकू विमान भी क्रैश हो गया था। यह हादसा जोरहाट एयरबेस से करीब 60 किलोमीटर दूर कार्बी आंगलोंग जिले के बोकाजन सब-डिवीजन में हुआ था। उस दर्दनाक दुर्घटना में देश ने स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर जैसे दो वीर सपूतों को खो दिया था।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here