भारत शांति, प्रगति और समृद्धि की सशक्त आवाज के रूप में उभर रहा : उपराष्ट्रपति

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सीपी राधाकृष्णन ने आईसीडब्ल्यूए के राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में 25 वर्ष पूरे होने पर आयोजित समारोह को किया संबोधित; सफल ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए विदेश मंत्री जयशंकर और विदेश मंत्रालय की टीम को दी बधाई

नई दिल्ली । उपराष्ट्रपति और भारतीय वैश्विक परिषद (आईसीडब्ल्यूए) के अध्यक्ष सीपी राधाकृष्णन ने कहा है कि मानव प्रगति और विश्व शांति तभी संभव है, जब सभी राष्ट्र एक-दूसरे की चिंताओं को समझें और पारस्परिक लाभ के लिए मिलकर काम करें। उन्होंने कहा कि कूटनीति का पहला उद्देश्य राष्ट्रों के बीच अच्छे संबंध स्थापित करना है और मानव प्रगति तथा विश्व शांति को साथ-साथ आगे बढ़ना चाहिए।
उपराष्ट्रपति मंगलवार को नई दिल्ली स्थित सप्रू हाउस में राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में भारतीय वैश्विक परिषद (आईसीडब्ल्यूए) के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित रजत जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह अवसर परिषद की उपलब्धियों के लिए आभार व्यक्त करने और आत्मचिंतन करने का भी है। उन्होंने आईसीडब्ल्यूए की उत्कृष्ट विरासत में योगदान देने वाले संस्थापकों, पूर्व नेतृत्वकर्ताओं, महानिदेशकों, विद्वानों, राजनयिकों, शोधकर्ताओं और कर्मचारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन की सराहना
सीपी राधाकृष्णन ने भारत में सफलतापूर्वक आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए विदेश मंत्री और आईसीडब्ल्यूए के उपाध्यक्ष डॉ. एस. जयशंकर, विदेश सचिव विक्रम मिसरी तथा विदेश मंत्रालय की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि संघर्षों और विरोधाभासों से घिरी दुनिया में नई दिल्ली नेताओं की घोषणा को सर्वसम्मति से अपनाया जाना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में संवाद, सहयोग और आपसी समझ को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। राष्ट्रों के बीच विश्वास और बेहतर संबंधों के माध्यम से ही वैश्विक शांति और स्थायी विकास का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।
वैश्विक मंच पर बढ़ रही भारत की भूमिका
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत शांति, प्रगति और समृद्धि की एक सशक्त आवाज के रूप में उभर रहा है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुंबकमÓ यानी ‘विश्व एक परिवार हैÓ की भावना को भारत की विदेश नीति और वैश्विक सहभागिता का महत्वपूर्ण आधार बताया।
उन्होंने कोविड संकट के दौरान भारत की ‘वैक्सीन मैत्रीÓ, आपदा के समय किए गए राहत एवं प्रतिक्रिया प्रयासों, पर्यावरण के लिए जीवन शैली (एलआईएफई), अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन जैसी पहलों को इस दर्शन के व्यावहारिक उदाहरण बताया।
डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की उपलब्धियों का उल्लेख
उपराष्ट्रपति ने यूपीआई और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पारदर्शी भुगतान प्रणालियां पारदर्शी शासन व्यवस्था की दिशा में योगदान करती हैं। भारत आईटीईसी और शैक्षिक सहयोग के माध्यम से वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ अपनी तकनीकी और संस्थागत क्षमताएं साझा कर रहा है।
उन्होंने ज़ांज़ीबार में भारत के बाहर स्थापित आईआईटी परिसर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की क्षमताओं और अनुभवों का लाभ दूसरे देशों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक दक्षिण के नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के बीच भारत के प्रति विश्वास एवं भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
आईसीडब्ल्यूए के लिए चार प्राथमिकताएं तय
सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि बदलते वैश्विक परिवेश में भारतीय वैश्विक परिषद की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने परिषद के लिए चार प्रमुख प्राथमिकताएं निर्धारित कीं।
पहली प्राथमिकता भारत की ‘पड़ोसी प्रथमÓ, ‘एक्ट ईस्टÓ, ‘वैश्विक दक्षिणÓ और ‘हिंद-प्रशांतÓ प्राथमिकताओं से संबंधित अनुसंधान को मजबूत करना है। दूसरी प्राथमिकता साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से संबंधित कार्यों का विस्तार करना है।
तीसरी प्राथमिकता विश्वविद्यालयों और युवा विद्वानों के साथ सहभागिता को और मजबूत करना तथा चौथी प्राथमिकता विश्व मामलों से संबंधित ज्ञान के एक विश्वसनीय भंडार के रूप में विकसित होना है, जिसमें भारत का प्रामाणिक दृष्टिकोण प्रतिबिंबित हो।
विकसित भारतञ्च2047 के लिए बौद्धिक रूप से तैयार हो आईसीडब्ल्यूए
उपराष्ट्रपति ने कहा कि आईसीडब्ल्यूए को ‘विकसित भारतञ्च2047Ó के लिए बौद्धिक और संस्थागत रूप से स्वयं को तैयार करना चाहिए। उन्होंने परिषद से अंतरराष्ट्रीय मामलों के अध्ययन के लिए दुनिया के सम्मानित केंद्रों में से एक बनने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आईसीडब्ल्यूए अपनी स्वर्ण जयंती तक भारत और एक शांतिपूर्ण विश्व व्यवस्था के निर्माण में और अधिक महत्वपूर्ण योगदान देगा।
समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति ने आईसीडब्ल्यूए की यात्रा और विकास को दर्शाने वाली फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने परिषद में योगदान के सम्मान में पूर्व महानिदेशकों को स्मृति-चिह्न भी प्रदान किए।

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